Philippians 4:2 in Hindi

Hindi Hindi Bible Philippians Philippians 4 Philippians 4:2

Philippians 4:2
मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें।

Philippians 4:1Philippians 4Philippians 4:3

Philippians 4:2 in Other Translations

King James Version (KJV)
I beseech Euodias, and beseech Syntyche, that they be of the same mind in the Lord.

American Standard Version (ASV)
I exhort Euodia, and I exhort Syntyche, to be of the same mind in the Lord.

Bible in Basic English (BBE)
I make request to Euodias and Syntyche to be of the same mind in the Lord.

Darby English Bible (DBY)
I exhort Euodia, and exhort Syntyche, to be of the same mind in [the] Lord;

World English Bible (WEB)
I exhort Euodia, and I exhort Syntyche, to think the same way in the Lord.

Young's Literal Translation (YLT)
Euodia I exhort, and Syntyche I exhort, to be of the same mind in the Lord;

Euodias,
I
εὐωδίανeuōdianave-oh-THEE-an
beseech
παρακαλῶparakalōpa-ra-ka-LOH
and
καὶkaikay
Syntyche,
Συντύχηνsyntychēnsyoon-TYOO-hane
beseech
παρακαλῶparakalōpa-ra-ka-LOH
the
same
mind
of
be
τὸtotoh
they
αὐτὸautoaf-TOH
that
φρονεῖνphroneinfroh-NEEN
in
ἐνenane
the
Lord.
κυρίῳkyriōkyoo-REE-oh

Cross Reference

इब्रानियों 12:14
सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा।

1 पतरस 3:8
निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।

1 थिस्सलुनीकियों 5:13
और उन के काम के कारण प्रेम के साथ उन को बहुत ही आदर के योग्य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो।

फिलिप्पियों 3:16
सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें॥

फिलिप्पियों 2:2
तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।

इफिसियों 4:1
सो मैं जो प्रभु में बन्धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।

1 कुरिन्थियों 1:10
हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो।

रोमियो 12:16
आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।

मरकुस 9:50
नमक अच्छा है,पर यदि नमक की नमकीनी जाती रहे, तो उसे किस से स्वादित करोगे? अपने में नमक रखो, और आपस में मेल मिलाप से रहो॥

भजन संहिता 133:1
देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें!

उत्पत्ति 45:24
और उसने अपने भाइयों को विदा किया, और वे चल दिए; और उसने उन से कहा, मार्ग में कहीं झगड़ा न करना।

याकूब 3:17
पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।